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महिलाओं का पुर्नवास करवाया

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बालिकाओं को संस्थान द्वारा शिक्षण सामग्री उपलब्ध कराई गई

संस्था के बारे में

प्यारी बहना महिला अनाथ आश्रम
एक सामाजिक पहल

  • संस्था की स्थापना
  • हमारा विज़न
  • हमारा उद्देश्य

प्यारी बहना संस्था की स्थापना 18 अगस्त 2013 को रक्षाबंधन के दिन संस्था के संस्थापक सोनू चारण ने की। सोनू चारण ने बताया कि संस्थान मुख्य तीन उद्देश्य पर कार्य करेगी - महिला शिक्षा, महिला सुरक्षा व महिला सशक्तिकरण पर।

सोनू चारण ने सर्वप्रथम एक पुस्तक लिखी "प्यारी बहना हास्यपद कविता संग्रह" जिसमें यह बताया गया है कि एक अनाथ बेटी को संस्था कैसे शिक्षा ग्रहण करवा कर आई.पी.एस. तक पहुंचाने का कार्य करती है। सर्वप्रथम चारण जी ने सात बेटीयों को गोद लिया जिनकों शिक्षा सामग्री उपलब्ध करवायी गई। वर्तमान में 2274 बालिकाओं को संस्थान ने गोद ले रखा है जिनकों शिक्षण सामग्री यथासमय उपलब्ध करवायी जाती है। उसके बाद महिला सुरक्षा को लेकर संस्थान ने एक हेल्पलाइन वैन शुरू कर रखी है। जिससे दहेज, मारपीट जैसे प्रकरणों का निवारण किया जाता है। अब तक 3404 महिलाओं का पुर्नवास करवाया जा चुका है...

हमारा विज़न एक ऐसे समाज का निर्माण करना है जहाँ कोई भी महिला या बच्चा बेसहारा न रहे। हम चाहते हैं कि हर जरूरतमंद को सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाएँ और आत्मनिर्भरता के अवसर प्राप्त हों। हमारा विश्वास है कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए प्रत्येक व्यक्ति को समान अवसर मिलना चाहिए। हम निरंतर प्रयासरत हैं कि अनाथ और असहाय लोगों को गरिमा के साथ जीवन जीने का अवसर मिले और वे अपने भविष्य का निर्माण स्वयं कर सकें।

संस्था के उद्देश्य:

  • यह एक गैर-राजनीतिक संगठन के रूप में कार्य करेगी एवं व्यक्तिगत मामलों से दूर रहेगी।
  • महिलाओं का सामाजिक, शैक्षिक उत्थान करना।
  • वृक्षारोपण करना एवं सार्वजनिक स्थानों का विकास करना।
  • महिलाओं को उनके सम्मानजनक अधिकार दिलाना एवं शिक्षा के लिए प्रेरित करना।
  • भ्रूण हत्या रोकने हेतु जनजागरूकता और प्रयास।
  • असहाय छात्राओं के लिए भरण-पोषण और शिक्षा की व्यवस्था करना।
  • गरीब कन्याओं के विवाह में सहयोग देना।
  • समाज में जागरूकता लाना एवं सामाजिक कुरीतियों का विरोध करना।
  • समाज का सर्वांगीण विकास करना।
  • केंद्र व राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ समाज तक पहुँचाना।
  • प्रति वर्ष घर-घर जाकर महिलाओं के अनुपात का सर्वेक्षण करना।
  • वृद्धजनों के कल्याण हेतु वृद्धाश्रम एवं सामुदायिक कार्यक्रमों का आयोजन।
  • तृतीय लिंग की पहचान हेतु कार्य करना और मेलों के माध्यम से समाज में जागरूकता लाना।
  • निराश्रित/असहाय बच्चों हेतु बाल संरक्षण कार्य, बालगृह एवं बालिका गृह का संचालन।
  • प्रौढ़ शिक्षा केंद्र का संचालन।
  • बेसहारा, अनाथ, विशेष योग्यजन महिलाओं के पुनर्वास हेतु गृह का संचालन एवं विशेष महिला बौद्धिक दिव्यांग विद्यालय/महाविद्यालय का संचालन या सहयोग। साथ ही महिलाओं से संबंधित खेलकूद एवं "नवजीवन सर्वे" का आयोजन।
  • विशेष योग्यजनों की सुगमता हेतु सहायक उपकरण वितरण, कृत्रिम अंग शिविर एवं पुनर्वास जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन।
  • भिखारियों, बेघरों, निराश्रितों और असहायों का पुनर्वास एवं कल्याण हेतु कार्य।
  • अनुसूचित जाति, जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, आर्थिक रूप से पिछड़ा वर्ग तथा कामकाजी महिला छात्रावास का संचालन। साथ ही सामूहिक विवाह, आय-संवर्धन, रोजगार एवं सामाजिक कार्यक्रमों का आयोजन।
  • महिला सशक्तिकरण हेतु महिला सुरक्षा व सलाह कार्य, सामुदायिक रसोई व वाचनालय का संचालन। साथ ही कार्य के अनुसार मानव संसाधन जैसे – रसोईया, चौकीदार, कंप्यूटर ऑपरेटर आदि की व्यवस्था एवं जिला/ब्लॉक/ग्राम स्तर पर जागरूकता कार्यक्रम (मैनेजमेंट इवेंट) का संचालन।
प्यारी बहना महिला अनाथ आश्रम

सेवाएं और सुविधाएं

बेसहारा महिलाओं को आश्रय

इस आश्रम ने कई महिलाओं को नई जिंदगी दी है। महिलाएं जो कभी आश्रयहीन थीं, अब आत्मनिर्भर बन चुकी हैं और समाज में सम्मानपूर्वक जीवन जी रही हैं।

सामूहिक विवाह

​प्यारी बहना महिला अनाथ आश्रम द्वारा आयोजित सामूहिक विवाह समारोह एक सराहनीय पहल है। इनका उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की सहायता करना, दहेज प्रथा को कम करना और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देना है।​

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